लोकनीति (Public policy) क्या है? जाने व इसके कार्य - Rajasthan Result

लोकनीति (Public policy) क्या है? जाने व इसके कार्य

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सरकार द्वारा बनाई गई वह नीति जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों का कल्याण करना है लोकनीति (Public policy) कहलाती है|

इसकीं निम्न विशेषताएं हैं

i) लोकनीति हमेशा सरकार द्वारा बनाई जाती है।

॥) इसका उद्देश्य लोक कल्याण होता है।

iii) लोक नीति के निर्माण में कई गैर सरकारी तत्वों की भी भूमिका होती है।

IV) लोकनीति निषेधात्मक भी हो सकती है अर्थात लोग नीति के अंतर्गत कुछ कार्य करने से रोका भी जा सकता है।

 

व्यवस्थापिका का कार्य नीति का निर्माण करना होता है जबकि कार्यपालिका उन नीतियों को लागू करती है।

कार्यपालिका दो प्रकार की होती है :-

A) राजनीतिक कार्यपालिका

इनका आधार राजनीति है तथा चुनाव जीतना इनकी एकमात्र योग्यता है।

B) स्थाई कार्यपालिका

इसे गैर राजनीतिक कार्यपालिका भी कहा जाता है यह चयनित होकर आते हैं इन्हें मेरीटोक्रेसी कहा जाता है।

 

नीतियों का निर्माण राजनीतिक के द्वारा किया जाता है लेकिन उसमें प्रशासकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है नीति निर्माण में प्रशासक भी भूमिका इस प्रकार से है :-

a) नीति निर्माण हेतु सूचनाएं वह तथ्य उपलब्ध करवाना।

b) नीति निर्माण हेतु विकल्प उपलब्ध करवाना।

c) नीति निर्माण हेतु सुझाव देना।

d) नीति क्रियान्वयन के संदर्भ में फीडबैक उपलब्ध करवाना।

लोकनीति निर्माण में प्रशासक की भूमिका के बढ़ने के निम्न कारण हैं :-

A) राजनीतिज्ञ कुछ समय के लिए पद धारण करते हैं जबकि प्रशासक स्थाई होते हैं।

B) राजनीतिज्ञों की तुलना में प्रशासक अधिक योग्य होते हैं क्योंकि यह चयनित होते हैं।

C) प्रशासकों को प्रशिक्षण प्राप्त होता है।

D) स्थाई सेवा में होने के कारण प्रशासन को अधिक अनुभव होता है।

लोकनीति के मॉडल

1. संस्थावादी मॉडल = लोक नीति का निर्माण केवल सरकार द्वारा किया जाता है तथा उसमें किसी अन्य संगठन की कोई भूमिका नहीं होती है।

2. समूह मॉडल = लोक नीति का निर्माण सरकार के द्वारा ही किया जाता है लेकिन उसमें अन्य संगठनों की भी भूमिका होती है जैसे मीडिया जनमत तथा स्वयंसेवी संस्थाएं और दबाव समूह।

3. अभिजात्य मॉडल = लोक कल्याण को ध्यान में रखकर नीति बनाने का दावा किया जाता है लेकिन वास्तविकता में नीति का लाभ केवल सरकार के निकटतम लोगों को होता है।

4. अभिवृद्धिकारी मॉडल = इसके अनुसार लोकनीति एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है अर्थात यह एक स्थान पर अथवा एक समय पर नहीं बनाई जाती है बल्कि उस में निरंतर सुधार चलता रहता है।

5. कूड़ादान मॉडल = लोक नीति का निर्माण किसी एक व्यक्ति के द्वारा एक समय में नहीं किया जाता है बल्कि समय के साथ उसमें अनेक लोगों का योगदान होता है।

लोकनीति के अध्ययन का महत्त्व ( Importance of public policy study )

सार्वजनिक नीति की समग्र समझ के लिए, सार्वजनिक नीति परिदृश्यों एवं पर्यावरणीय शक्तियों के मध्य के संयोजन का विश्लेषण किया जाना चाहिए। सार्वजनिक नीति के विभिन्न आयामों को समझने की घोर आवश्कता है।

वास्तव में आधुनिक विश्व में, सार्वजनिक नीतियां मानव जाति की नियति का निर्धारण करती है। मानव मात्र का कल्याण तथा आर्थिक उद्धार, सार्वजनिक नीति की निपुणता पर निर्भर है। यदि अकुशल नीतियाँ साल दर साल जारी रखीगयी तो वे नीतियाँ लोगों के आर्थिक स्तर का ह्रास करने में योगदान देगी।

अकुशल नीतियों को छोड़ना ही होगा। सही लक्ष्यों के साथ यही सार्वजनिक नीतियों को अपनाना होता हैं।

लोकनीति निर्माण की विशेषताएं ( Features of Public Policy Creation)

1 लोकहित पर आधारित।

2 सरकारी संस्थाओं द्वारा बनाया जाना।

3 लोक नीति जटिल प्रक्रिया का परिणाम।

4 दिशा निर्देश रेखांकित करना।

5 भविष्योंन्मुख

6 विभिन्न निकायों व प्राधिकरणों का योगदान।

लोकनीति के प्रकार ( Types of public policy )

भारत में लोकनीतियों का वर्गीकरण मुख्य रूप से दो आधारों पर किया जाता है-

विषय वस्तु के आधार पर-

विषय वस्तु के आधार पर लोकनीतियां के निम्न प्रकार की हो सकती है-

आर्थिक

सामाजिक

राजनीतिक

सुरक्षा संबंधी आदि

नीति की तकनीकी प्रकृति के आधार पर-

तात्विक अथवा सारगत नीतियां

नियंत्रक नीतियां

वितरक नीतियां

पुनः वितरक नीतियां

निर्माणकारी नीतियां

लोकनीति निर्माण के चरण ( Steps for the development of democracy )

1 समस्या को पहचानना

2 समस्या के समाधान हेतु विभिन्न उपलब्ध विकल्पों का तुलनात्मक अध्ययन

3 सबसे उत्तम विकल्प का चयन

4 नीतियों का क्रियान्वयन

5 लोकनीति क्रियान्वयन की देखरेख

6 मूल्यांकन

भारत में नीति निर्धारण के अभिकरण ( Agency for Policy Assessment in India )

1 संविधान

2 संसद

3 मंत्रिमंडल

4 संघीय अभिकरण-

नीति आयोग

  • राष्ट्रीय विकास परिषद्
  • वित आयोग
  • अन्तर्राज्य परिषद्
  • क्षेत्रीय परिषदे

5 न्यायपालिका

6 दबाव समूह

7 प्रेस

8 परामर्श समितियां

9 राजनीतिक दल

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